पर्यावरण से जुड़े प्रोजेक्ट

पारदर्शिता का एलान: ग्लोबल फ़ॉरेस्ट वॉच, मछली पकड़ने के प्रबंधन में किस तरह बदलाव ला रहा है

जून 2018
शार्क, मछली, और रीफ़ पर रहने वाले दूसरे समुद्री जीवों की, समुद्र के अंदर से ली गई तस्वीर और ऊपर चमकता हुआ नीला आसमान.

समुद्र से जुड़ी रिसर्च करने वाले एनरिक साला कहते हैं, मेक्सिको का रेविलागिगेडो द्वीपसमूह "उष्णकटिबंधीय (ट्रॉपिकल) उत्तरी अमेरिका की ऐसी जगह है जहां समुद्री जीवों की कई प्रजातियां पाई जाती हैं." “यह ऐसा है, जैसे ग्लापगोस द्वीपसमूह ने मेक्सिको में अपनी एक ब्रांच खोल ली हो.”

कई तरह की शार्क और मैंटा रे मछलियां, इस द्वीपसमूह के चार ज्वालामुखी द्वीपों के बीच बड़े आराम से घूमती-फिरती हैं. मैंटा रे के बारे में साला कहते हैं—इनका व्यवहार दोस्ताना और उत्सुकता वाला होता है, जिसकी वजह से गोताखोरों की इनमें ज़्यादा दिलचस्पी रहती है. इन मछलियों का आकार, किसी जिराफ़ की लंबाई के बराबर हो सकता है. टूना, ग्रुपर, डॉल्फ़िन, हंपबैक व्हेल, और पांच तरह के समुद्री कछुए, समुद्री जीवन को एक शानदार दुनिया बनाने में अहम योगदान देते हैं.

यह इस इकोसिस्टम की अलग-अलग चीज़ों का आकर्षण ही है, जो साला जैसे पर्यावरण संरक्षकों को लड़ने की हिम्मत देता है. नैशनल जियोग्राफ़िक Pristine Seas के कार्यकारी निदेशक के तौर पर साला, हर उस समुद्री जगह को बचाए रखने की लड़ाई लड़ रहे हैं जहां समुद्री जीवों का अस्तित्व है. साला और उनकी टीम ने 2016 में, रेविलागिगेडो के आस-पास मौजूद समुद्री इलाकों में खोज की थी और वैज्ञानिक सबूत इकट्ठा किए थे, ताकि इस द्वीपसमूह को संरक्षित समुद्री क्षेत्र बनाया जा सके. संरक्षित समुद्री क्षेत्र एक ऐसा इलाका होता है जहां मछली पकड़ने और समुद्र से दूसरी चीज़ें निकालने (खनन) पर पाबंदी होती है.

रेविलागिगेडो में विशाल मेंटा रे मछलियां, गोताखोरों के साथ-साथ तैरने के लिए जानी जाती हैं. रेविलागिगेडो, मेक्सिको में बाहा कैलिफ़ोर्निया से 386 किलोमीटर दूर दक्षिण-पश्चिम में स्थित है. फ़ोटो: एनरिक साला / नैशनल जियोग्राफ़िक

हालांकि, यह एक ऐसा इलाका भी है जिसकी सुरक्षा करना प्रशासन के लिए मुश्किल है. ऐसा इसलिए है, क्योंकि यह सीधे तौर पर इकोसिस्टम, खाद्य सुरक्षा, और मछली पकड़ने पर निर्भर अर्थव्यवस्था से जुड़ा हुआ है. इस वजह से, मछली पकड़ने वाले कारोबारियों के वे तर्क हमेशा जीत जाते हैं जिनमें मछली पकड़े जाने के कारोबार पर रोक न लगाने के लिए कहा जाता है.

हालांकि, ग्लोबल फ़ॉरेस्ट वॉच (GFW) का शुक्र है कि अब यह स्थिति बदल गई है.

जीएफ़डब्ल्यू (GFW) के पारदर्शिता प्लैटफ़ॉर्म का इस्तेमाल करके और इलाके में गतिविधि कर रही नावों पर नज़र रखकर, Pristine Seas और उसके रिसर्च पार्टनर, मेक्सिको और दुनिया के दूसरे हिस्सों में कारोबार के लिए मछली पकड़ने वाले बेड़ों की जगह और व्यवहार देख पा रहे थे. इस डेटा से मेक्सिको सरकार को साफ़ तौर पर पता चलने लगा कि कौन, कहां मछली पकड़ रहा है, और कितनी बार पकड़ रहा है. इस जानकारी से मछली पकड़ने वाली इंडस्ट्री के दावों को गलत साबित किया जा सका.

2018 में मछली पकड़ने से जुड़ी अर्थव्यवस्था पर TED Talk करने वाले साला कहते हैं, “ग्लोबल फ़ॉरेस्ट वॉच से हम देख पाए कि मछली पकड़ने वाले अलग-अलग बेड़े कहां मछली पकड़ रहे थे”. जब टूना मछली पकड़ने वाली मेक्सिको की इंडस्ट्री ने कहा, ‘हम मछलियां पकड़ने का ज़्यादातर काम इसी इलाके में करते हैं', तो उनकी इस बात को गलत साबित करने के लिए हमारे पास डेटा मौजूद था. जीएफ़डब्ल्यू (GFW) का इस्तेमाल करना हमारे लिए काफ़ी मददगार साबित हुआ, क्योंकि पहली बार ऐसा हुआ था जब हम इंडस्ट्री में आपसी सहमति के साथ समझौता करने के दौरान, पारदर्शी डेटा सामने लेकर आए.”

गहरे समुद्र में मछली पकड़ने की गतिविधियों में पारदर्शिता

अहम मुद्दों पर ध्यान खींचने के लिए डेटा का इस्तेमाल करना और ज़रूरी फ़ैसले लेने वाले लोगों को इसके बारे में बताना, हमेशा से Google की प्राथमिकता रही है. इसी सोच के साथ हमारी Earth Outreach टीम ने, 2014 में समुद्र से जुड़े मामलों पर काम करना शुरू किया. इस तरह से, Oceana और SkyTruth के साथ साझेदारी में ग्लोबल फ़िशिंग वॉच (जीएफ़डब्ल्यू) की शुरुआत हुई. हमारा मकसद था, पूरी दुनिया में मछली पकड़ने की व्यावसायिक गतिविधियों की सही तस्वीर पेश करना, ताकि अहम समुद्री जीवों के आवासों का बचाव किया जा सके. साथ ही, हम मछली पकड़ने की जगहों के लिए, लंबे समय तक ईको-फ़्रेंडली तरीके से मैनेज किए जाने वाले नए टूल उपलब्ध करा सकें. साल 2016 में, अमेरिका के उस समय के विदेश मंत्री जॉन केरी के आवर ओशन कॉन्फ़्रेंस में हमने, ग्लोबल फ़िशिंग वॉच (जीएफ़डब्ल्यू) लॉन्च किया. यह एक ऐसा सार्वजनिक प्लैटफ़ॉर्म है जिस पर मछली पकड़ने वाली दुनिया भर की तकरीबन 60,000 सबसे बड़ी नावों का डेटा है. साथ ही, इस डेटा को इंटरैक्टिव तरीके से शेयर किया जाता है. इस प्लैटफ़ॉर्म में एक ऑनलाइन मैप है. इसकी मदद से, इंटरनेट कनेक्शन की सुविधा रखने वाला कोई भी व्यक्ति, करीब-करीब रीयल टाइम में मछली पकड़े जाने की गतिविधि देख सकता है. इस प्लैटफ़ॉर्म पर, 2012 से लेकर 3 दिन पहले तक की गतिविधि देखी जा सकती है.

मछली पकड़ने पर लगी तीन महीने की पाबंदी के बाद समुद्र में जाते हज़ारों चीनी ट्रॉलर (मछली पकड़ने वाले जहाज़).

इसके लॉन्च होने के दो साल में ही सरकारों, रिसर्च करने वालों, और मछली पकड़ने वाले संगठनों ने ऐतिहासिक तरीकों से जीएफ़डब्ल्यू (GFW) इस्तेमाल करना शुरू कर दिया—जिससे नए मरीन रिज़र्व बने और मछली पकड़ने पर आधारित स्थानीय अर्थव्यवस्थाओं को मज़बूती मिली. साथ ही, बंधुआ मज़दूरों का इस्तेमाल करने वाली नावों की पहचान करने में भी इनकी मदद ली जा रही है.

मछली पकड़ने का कारोबार अपने चरम पर है. पूरी दुनिया के 3.1 अरब लोगों को जानवरों से मिलने वाले प्रोटीन का 20% हिस्सा, मछलियों से मिलता है. साथ ही, दर्जनों देशों की अर्थव्यवस्थाएं मछली पकड़ने के कारोबार की बदौलत अच्छे से काम कर रही हैं. इसके बावजूद, दुनिया में मौजूद मछलियों के स्टॉक का करीब 90% से ज़्यादा मछलियां पकड़ी जा रही हैं या सारी मछलियां पकड़ी जा चुकी हैं. इसके अलावा, दुनिया भर में पकड़ी गई कुल मछलियों में से 15% गैरकानूनी तरीके से पकड़ी गई हैं, मछली पकड़े जाने की जानकारी नहीं दी गई है, और इस पर कोई कंट्रोल नहीं है (IUU).1

जीएफ़डब्ल्यू (GFW) किस तरह काम करता है: हर समय, तकरीबन 3,00,000 नावें, ऑटोमैटिक आइडेंटिफ़िकेशन सिस्टम (एआईएस) डेटा इस्तेमाल करके सार्वजनिक तौर पर अपनी जगह की जानकारी देती हैं. यह समुद्र में जाने वाली बड़ी नावों पर लगे जीपीएस जैसा ब्रॉडकास्ट सिस्टम है. इसे सुरक्षा के तौर पर डिज़ाइन किया गया है, ताकि नावों की टक्कर न हो. इसके साथ ही, जीएफ़डब्ल्यू (GFW) प्लैटफ़ॉर्म दूसरे डेटा स्रोत को भी फ़ीड करता है—जैसे हर रोज़ छह करोड़ पॉइंट से भी ज़्यादा जानकारी—मशीन लर्निंग के क्लासिफ़ायर (वर्गीकरण) से यह तय करने के लिए कि कौनसी नावें मछली पकड़ने वाली हैं और वे मछली पकड़ने के लिए कौनसे गियर (उदाहरण., लॉन्गलाइन, पर्स सेइन, ट्रॉल) का इस्तेमाल कर रही हैं. साथ ही, उनकी हलचल को देखते हुए यह जानकारी कि वे कब और कहां मछली पकड़ रही हैं.

संगठन जिस तरह चाहें, इस डेटा का इस्तेमाल कर सकते हैं. कई संगठन इस डेटा का पूरा फ़ायदा उठा रहे हैं. जीएफ़डब्ल्यू (GFW) के सह-संस्थापक और वरिष्ठ कार्यक्रम प्रबंधक, ब्रायन सुलिवन कहते हैं, “हम देख रहे हैं कि सभी रिसर्च लैब और सरकारी एजेंसियां मछली पकड़ने के प्रबंधन की अपनी सोच में बदलाव ला रही हैं.”

समुद्र में डकैती के ख़िलाफ़ लड़ाई

देश की सीमा में आने वाले समुद्र में गैरकानूनी तरीके से मछली पकड़े जाने की गतिविधि पर लगाम लगाने के लिए, इंडोनेशिया के मछली उद्योग और समुद्री मामलों की मंत्री, सुसी पुजिअस्तुति, जीएफ़डब्ल्यू (GFW) डेटा का इस्तेमाल कर रही हैं.

गैरकानूनी तरीके से मछली पकड़े जाने के ख़िलाफ़ कड़ा रुख अपनाने के लिए मशहूर पुजिअस्तुति, 2014 से अब तक ऐसे 380 जहाज़ों को समुद्र में डुबोने की सज़ा सुना चुकी हैं जिन्होंने मछली पकड़ने से जुड़े स्थानीय नियमों का उल्लंघन किया था. इसी तरह से, पुज़िअस्तुति ने 2017 में एक और बहादुरी भरा कदम उठाया. उसी समय इंडोनेशिया, पहला ऐसा देश बना जिसने जहाज़ों पर नज़र रखने के लिए, अपने मालिकाना हक वाले वेसल मॉनिटरिंग सिस्टम (वीएमएस) को जीएफ़डब्ल्यू (GFW) के लिए सार्वजनिक रूप से उपलब्ध कराया.

ऐसे सभी जहाज़ों पर ऑटोमैटिक आइडेंटिफ़िकेशन सिस्टम (एआईएस) होना ज़रूरी है जिनका वज़न 300 टन से ज़्यादा है. हालांकि, छोटे जहाज़ों के लिए नियम, इलाकों के हिसाब से अलग होते हैं. इंडोनेशिया में 30 टन की क्षमता वाले जहाज़ों पर वेसल मॉनिटरिंग सिस्टम (वीएमएस) होना ज़रूरी है. इसकी वजह से कारोबारी तौर पर मछली पकड़ने वाली करीब 5,000 छोटी नावें जीएफ़डब्ल्यू (GFW) के मैप पर दिखने लगीं.

जीएफ़डब्ल्यू (GFW) ने दो साल तक बहुत करीब से इंडोनेशियाई सरकार से जुड़े लोगों के साथ वीएमएस का विश्लेषण करने और उसके बारे में समझने के लिए काम किया, ताकि यह समझा जा सके कि इंडोनेशिया में कौन-कौनसे कदम उठाने ज़रूरी हैं. इस साझेदारी से इंडोनेशिया को उन इंडोनेशियाई नावों के बारे में नई अहम जानकारी मिली जो तीन महीने की अनुमति वाली अवधि से ज़्यादा समय तक मछली पकड़ रही थीं या उन जगहों पर मछली पकड़ रही थीं जहां जाने का उनके पास लाइसेंस नहीं था. ये सब, नावों की जगह और हलचल को मापने से पता चला.

रिसर्च से पता चलता है कि इंडोनेशिया का नीतियों और डेटा के बीच साझेदारी का फ़ैसला सही साबित हो रहा है. इंडोनेशिया में विदेशी लोगों के मछली पकड़ने में 90% की कमी आई, वहीं कुल मछली पकड़ने की गतिविधियों में भी 25% की कमी आई. अनुमान लगाया जा रहा है कि इससे इंडोनेशिया की मछली पकड़ने से जुड़ी अर्थव्यवस्था में तेज़ी आएगी, क्योंकि मछलियां बढ़ जाएंगी.2

साल 2017 और 2018 में जिन देशों ने जीएफ़डब्ल्यू (GFW) के लिए हमारे साथ साझेदारी की उनमें से इंडोनेशिया पहला देश है. पुजिअस्तुति ने 2017 के यूएन ओशियन कॉन्फ़्रेंस में इंडोनेशिया का वीएमएस, सार्वजनिक रूप से रिलीज़ करने की घोषणा की और दूसरे देशों से भी ऐसा करने की अपील की. कॉन्फ़्रेंस के बाद के हिस्से में पेरू ने ऐसी ही घोषणा की और मई 2018 में कोस्टा रिका भी इस मुहिम में शामिल हो गया.

सुसी पुजिअस्तुति ने नावों पर नज़र रखने वाला इंडोनेशिया का सिस्टम सार्वजनिक करने की घोषणा की, जो 2017 यूएन ओशियन कॉन्फ़्रेंस में लॉन्च हुआ.
सुसी पुजिअस्तुति ने नावों पर नज़र रखने वाला इंडोनेशिया का सिस्टम सार्वजनिक करने की घोषणा की, जो 2017 यूएन ओशियन कॉन्फ़्रेंस में लॉन्च हुआ.

वर्ल्ड ओशियन डे के मौके पर 8 जून, 2018 को जीएफ़डब्ल्यू (GFW) ने मछली पकड़े जाने के बारे में बेहतर तरीके से समझने के लिए दो नए लेयर लॉन्च किए: संभावित ट्रांसशिपिंग का सबसे पहला “लाइव” ग्लोबल व्यू. साथ ही, रात के समय की तस्वीरें, जिनसे यह पहचानने में मदद मिलती है कि नावें रात को चल रही हैं. ट्रांसशिपिंग का मतलब है, पकड़ी गई मछलियों को समुद्र में ही दूसरी नावों पर पहुंचा दिया जाना. इससे यह पता नहीं चल पाता कि असल में मछलियां किस इलाके से पकड़ी गई हैं. साथ ही, इससे गैरकानूनी तरीके से मछली पकड़ने, उनकी तस्करी करने, और यहां तक कि बंधुआ मज़दूरी तक का पता लगाना मुश्किल होता है. संयुक्त राज्य अमेरिका के नैशनल ओशिएनिक ऐंड ऐटमॉस्फ़ेयरिक एडमिनिस्ट्रेशन के साथ मिलकर तैयार की गई रात के समय की तस्वीरों की मदद से, विज़िबल इंफ़्रारेड इमेजिंग रेडियोमीटर सुइट (वीआईआईआरएस) सैटलाइट फ़ीड को प्रोसेस किया जाता है. इससे, ऐसी करीब 20,000 नावों की पहचान की जाती है जो रात को ऑटोमैटिक आइडेंटिफ़िकेशन सिस्टम (एआईएस) ब्रॉडकास्ट नहीं कर रहीं. इन तस्वीरों की मदद से, रिसर्च करने वालों को मछली पकड़ने की जगहों और ऐसी छोटी नावों के बारे में नई जानकारी मिलती है जिनकी पहचान पहले जीएफ़डब्ल्यू (GFW) नहीं कर पाता था.

मछली पकड़ने के आर्थिक और पर्यावरण से जुड़े फ़ायदे

कुछ मामलों में, कई संगठन रिसर्च के लिए, प्रवर्तन के बजाय जीएफ़डब्ल्यू (GFW) का इस्तेमाल कर रहे हैं. रेविलागिगेडो आर्किपेलागो को नो-टेक रिज़र्व में बदलने के ख़िलाफ़, मेक्सिको की टूना इंडस्ट्री की दलील थी कि आइलैंड के आस-पास मछली पकड़ने पर पाबंदी लगाने से स्थानीय टूना मछली की पैदावार 20 प्रतिशत कम हो जाएगी. इससे हज़ारों लोगों की नौकरियां चली जाएंगी और बाज़ार में टूना की कीमतें आसमान छूने लगेंगी.

हालांकि, Pristine Seas ने यह जानने के लिए जीएफ़डब्ल्यू (GFW) के साथ साझेदारी की कि रेविलागिगेडो के आस-पास दरअसल चल क्या रहा है. जीएफ़डब्ल्यू (GFW) डेटा के अनुसार, मेक्सिकन नावों ने जो टूना (मछली) पकड़ी उनमें से तकरीबन 75% अपने देश से बहुत दूर—अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में—वहीं चार प्रतिशत से भी कम रेविलागिगेडो के पास पकड़ी गई थीं.

रेविलागिगेडो के भविष्य के बारे में सभी जानकारी को ध्यान में रखते हुए फ़ैसला लेने वाले अधिकारियों के लिए, यह रिसर्च बहुत अहम साबित हुई. साल 2017 में 57,000 वर्ग मील के आर्कापेलगो को आधिकारिक रूप से नो-टेक (खतरे की कगार पर पहुंची मछलियों और दूसरे जीवों को पनपने में मदद करने की सुरक्षित जगह) नैशनल पार्क का दर्जा दिया गया. पिछले दो साल में Pristine Seas ने जीएफ़डब्ल्यू (GFW) रिसर्च की मदद से ऐसे पांच नो-टेक रिज़र्व स्थापित करवाने में मदद की है.

मछली पकड़ने के उचित प्रबंधन से जुड़े फ़ायदे बताने में भी शोधकर्ता जीएफ़डब्ल्यू (GFW) का इस्तेमाल कर रहे हैं सैंटा बारबरा की यूनिवर्सिटी ऑफ़ कैलिफ़ोर्निया की एक टीम ने, इंडोनेशिया में आईयूयू (IUU) फ़िशिंग के बारे में गहराई से जानने के लिए जीएफ़डब्ल्यू (GFW) की जांच की. डेटा का इस्तेमाल करके उन्होंने बताया कि आईयूयू (IUU) फ़िशिंग पर रोक लगाने से, सालाना पैदावार को लंबे समय तक टिकाऊ बनाए रखने के साथ-साथ, 2035 तक मछली पकड़े जाने की संख्या 14 प्रतिशत और मुनाफ़ा 15 प्रतिशत तक बढ़ जाएगा. इससे मौजूदा आय में किसी तरह की कमी भी नहीं आएगी. 3

सैंटा बारबरा की यूनिवर्सिटी ऑफ़ कैलिफ़ोर्निया के प्रोफ़ेसर, क्रिस्टोफ़र कॉस्टेलो, साला के साथ मिलकर यह पता लगा रहे हैं कि जीएफ़डब्ल्यू (GFW) का इस्तेमाल और किन चीज़ों में किया जा सकता है. इसमें किसी इलाके में मछलियों के पकड़े जाने के आधार पर, मछलियों के स्टॉक का अनुमान लगाना भी शामिल है. उनका कहना है, “हमें लगता है कि जीएफ़डब्ल्यू (GFW) का इस्तेमाल करके हम अंतरिक्ष से मछलियों के स्टॉक का अंदाज़ा लगा पाएंगे.” “मछलियां ढूंढने में मछुआरों का जवाब नहीं होता. इसलिए, इनकी मदद से हम रीयल टाइम में मछलियों के व्यवहार की स्टडी कर सकते हैं. साथ ही, इस स्टडी का इस्तेमाल करके, बेहतर तरीके से समझ सकते हैं कि दुनिया भर में मछलियों का कितना स्टॉक है.”

जीएफ़डब्ल्यू (GFW), विशेषज्ञों की सहायता से स्पिलओवर इफ़ेक्ट बनाने की कोशिश कर रहा है. इस तरह की साझेदारी से, आने वाली पीढ़ी को दुनिया भर में मछली पकड़ने की जगहों को समझने का मौका मिलेगा. साथ ही, वे जीएफ़डब्ल्यू (GFW) के ताकत को भी जान पाएंगे.

जीएफ़डब्ल्यू (GFW) के बारे में सुलिवन कहते हैं, “आखिरकार मछली पकड़ने के विज्ञान और इसकी नीतियों के लिए काम करने वाले संगठनों के साथ मिलकर, डेटा के आंकड़ों और मशीन लर्निंग में हमारी विशेषज्ञता बढ़ रही है.” “जब हमने इस तकनीक को 2016 में लॉन्च किया था, तब हर किसी ने इस बारे में बात की. दो साल से भी कम समय के बाद हम मशीन लर्निंग को नजरअंदाज़ करने लगे हैं. अब लोग विज्ञान, नीतियों, और असल ज़िंदगी पर पड़ने वाले असर के बारे में बात करने लगे हैं.”

हीरो इमेज में रेविलागिगेडो द्वीपसमूह को दिखाया गया है. यह उन जगहों में से एक है जहां दुनिया भर में शार्क और विशाल मेंटा रे मछलियों की सबसे ज़्यादा आबादी पाई जाती है. फ़ोटो क्रेडिट: एनरिक साला / नैशनल जियोग्राफ़िक

1 Food and Agriculture Organization of the United Nations, द स्टेट ऑफ़ वर्ल्ड फ़िशरीज़ ऐंड एक्वाकल्चर: कंट्रीब्यूटिंग टू फ़ूड सिक्योरिटी ऐंड न्यूट्रिशन फ़ॉर ऑल, 2016, http://www.fao.org/3/a-i5555e.pdf

2 रेनियल बी. कैबरल और अन्य, "रैपिड ऐंड लास्टिंग गेन्स फ़्रॉम सॉल्विंग इल्लीगल फ़िशिंग" नेचर इकोलॉजी ऐंड इवॉल्यूशन, मार्च 2018, https://www.nature.com/articles/s41559-018-0499-1

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